सोलहवीं शरीफ के मौके पर जश्न ए उर्स शमशी तेहरानी*


रेहान ख़ान ब्यूरो चीफ फर्रुखाबाद 9452755077

*सोलहवीं शरीफ के मौके पर जश्न ए उर्स शमशी तेहरानी*
फर्रुखाबाद फतेहगढ़ आज दिनांक  3 जून 2026 शहर की एतिहासिक वा गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल की लोको स्थिति दरगाह हज़रत मखदूम शाह सय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहि रहमा में ज़िल्हज महीने की 16 वी शरीफ बड़े ही धूम धाम से मनाई गई साथ ही इस मौके पर दूर दराज से आए अकीदतमंदों ने अपने अपने तरीके से फूल वा चादर पेश की।
 फ़िर बाद नमाज़ असर सातवां सालाना उर्स क़ुतुबुल अक़ताब मुफ्ती जियाउद्दीन शमसी तेहरानी अलैहि रहमा टोंकवी का भी मनाया गया और कुल शरीफ की नज़रो नियाज़ पेश कर फूल और चादर पेश की।
जिसमे सभी मजहब के जायरीनों ने हाजिरी दी और अपनी अकीदत पेश की और लंगर भी तकसीम किया गया।
इस मौके पर खानकाह शरीफ़ के सज्जादा नशीन जानशीन ए हुज़ूर मोहब्बत शाह पीरजादा शाह मुहम्मद वसीम उर्फ मुहम्मद मियां ने खिताब कर कहा की सभी को खानकाहों से अकीदत रखना चाहिए जोकि आपसी भाई चारे को बढ़ावा देती है ये दरगाहें मानवता का प्रतीक और तर्जुमान है इंसानियत का, सूफी संतों ने सदैव अमन संदेश देने के साथ सभी धर्मों का सम्मान करने की शिक्षा दी है आज सूफी संतो की शिक्षा से दूरी हमारे भाई चारगी को समाप्त कर रही है। हर दौर में औलिया ए कराम ने अमन भाई चारगी का सन्देश इनके आस्ताने पे आने वालों को रूहानी फैज़ के साथ साथ इंसानियत का भी पैग़ाम मिलता है और सूफ़ि संतों ने समाज से बुराइयों को मिटा कर एक साफ़ समाज की बुन्याद रख्खी है और चारों ओर मोहब्बत के हमेशा चिराग रोशन करते रहे।

वहीं दारुल इफ्ता के मुफ़्ती व उस्ताद ग़ुलाम आसी साहब ने बेहतरीन अंदाज में ख़िताब किया हज़रत प्रोफेसर मुफ़्ती ज़ियाउद्दीन शम्सी तहरानी रहमतुल्लाह अलैह एक ऐसे महान और बहुमुखी व्यक्तित्व थे, जिनकी मिसाल सदियों में कभी-कभार ही देखने को मिलती है। आपने आला हज़रत मुफ़्ती शाह मज़हरुल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की खानकाह नक्शबंदिया मज़हरिया से आध्यात्मिक फ़ैज़ प्राप्त किया और इल्म व रूहानियत की जो शमा रोशन की, उसे आपके जानशीन हज़रत शाह मोहब्बत शाह फतेहगढ़ ने पूरी लगन और ख़ुलूस के साथ आगे बढ़ाया।

*हज़रत ख्वाजा मोहब्बत शाह अलैहि रहमा को जानशीनी और ख़िलाफ़त और बना आध्यात्मिक सिलसिलो फतेहगढ़ बना मसकन*

आपके प्रमुख ख़लीफ़ा और जानशीन हज़रत ख़्वाजा मोहम्मद शरीफ़ उर्फ़ मोहब्बत शाह अलैहि रहमा थे। आपने उनकी आध्यात्मिक योग्यता, सेवा और समर्पण को देखकर उन्हें ख़िलाफ़त और इजाज़त प्रदान की तथा "मोहब्बत शाह" का ख़िताब अता फ़रमाया।

हज़रत ख्वाजा मोहब्बत शाह अलैहि रहमा ने फ़तेहगढ़ को अपना केंद्र बनाया और वहाँ से दीन, तसव्वुफ़ और इंसानियत की सेवा का कार्य जारी रखा। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही हज़रत पीरज़ादा शाह मोहम्मद वसीम उर्फ़ मोहम्मद मियाँ साबरी मुजद्दिदी मज़हरी को अपना जानशीन और दरगाह हज़रत मखदूम शाह सय्यद शहाबुद्दीन औलिया का सज्जादा नशीन भी नियुक्त किया।

खानकाह फतेहगढ़ के सज्जादा नशीन व जानशीन ए हुज़ूर मोहब्बत शाह पीरजादा शाह मुहम्मद वसीम उर्फ मुहम्मद मियां चिश्ती साबरी मुजद्दीदी अपने बुज़ुर्गों की तालीमात पर चलते हुए दीन-ए-इस्लाम की ख़िदमत, समाज की इस्लाह और नौजवानों की दीन की सही जानकारी देने का काम कर रहे हैं। उनकी सरपरस्ती में ख़ानकाह आज भी मुहब्बत, अमन और रूहानी फ़ैज़ का एक अहम मरकज़ बनी हुई है, जहाँ दूर-दूर से लोग फ़ैज़ हासिल करने आते है हज़रत शम्सी तहरानी रहमतुल्लाह अलैह एक बेहतरीन शायर भी थे। "शम्सी" आपका तख़ल्लुस था। आपका सूफ़ियाना कलाम आज भी लोगों में लोकप्रिय है और ख़ास तौर पर औलिया-ए-किराम तथा ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ से आपकी मुहब्बत उसमें झलकती है।

हज़रत प्रो. मुफ़्ती सैयद ज़ियाउद्दीन शम्सी तहरानी रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी पूरी ज़िंदगी इल्म, अमल, तसव्वुफ़ और इंसानियत की सेवा में गुज़ारी।

मौलाना शोएब आतिर मदारी और हाफिज अरशद साबरी ने कुल शरीफ में बेहतरीन अंदाज में क़ुरआन पाक की तिलावत कर नजरों नियाज़ पेशकर फूल और चादर पेश की।

इस मौके पर क़व्वाल कमालुद्दीन ने कलाम पेश किये,

तू बढ़ा गरीब नवाज है, है दयारे फ़ैज़ो अता यही ये दरे गरीब नवाज़ है
इसी दर मै भी फ़कीर हु मुझे अपने ख्वाजा पे नाज़ है।

इश्क में तेरे कोहे ग़म सर पे लिया जो हो सो हो, ऐस ओ निसार जिंदगी छोड़ दिया जो हो सो हो,

मुझ से मरीज़ को कभी हाथ अपना तू मत लगा मुझको ख़ुदा पे तू छोड़ दे कहने लगा जो हो सो हो।

हाफिज फरहान सबरी, अयान साबरी व आरिश साबरी ने बेहतरीन अंदाज में कुरान पाक की तिलावत की।

इस मौके पर अंसार साबरी,अफ़ज़ल हुसैन नियाज़ी, रफत हुसैन, हनीफ भाई,राजू भाई अरशद सबरी तनवीर खान राहुल,फैसल साबरी, आकाश, शिवम आदि मौजूद रहे।