जय श्रीमन्नारायण

 लखनऊ डेस्क प्रदीप शुक्ला 


जय श्रीमन्नारायण 

वासुदेव जस रथ के संगी, हृषीकेश गोविंद अभंगी।

गरुड़ध्वज मधुसूदन सोई, सदा नमन मोरे मन जोई॥


पीतांबर तन सुंदर साजा, कमल नयन मन मोहन राजा।

चतुरभुज शंख चक्र गदा धारी, नमन करूँ हरि श्रीमन प्यारी॥


माखनचोर ग्वालिन भूषण, व्रजनायक लीलानंदन।

गोविंद, गोपाल, कृपा सागर, नमन करूँ मैं श्याम गिरिधर॥


यशोदा तनु लालन प्यारा, शूर सुत नंदन सुखसारा।

राधा-प्रिय व्रजमंडल नायक, भक्त-वत्सल हरि सुखदायक॥


वेणु वादन मधुर सुनाई, श्याम तनू लीला सुखदाई।

गोप-गोपियन गुन गावत, नमन करूँ प्रभु जनमन भावत॥


कंस चाणूर नाशन करई, कुंसपुरी सुख लीला भरई।

गोकुलनाथ करुणा सागर, भक्तन के तुम पालन कारगर॥


मुरलीधर व्रजरसिक बिहारी, गोविंद रूप मनहुं बनवारी

तुम बिन मोहि मोक्ष न भावा, जनारदन मोरे मन भावा॥


कृष्ण-कृष्ण योगीश्वरो भारी, रक्षक भक्तन सुखसंवारी।

नाथ तुम्हहि नित नमन हमारो, हरि न दूजो आधार हमारो॥