श्रीजगन्नाथाष्टकम्
लखनऊ डेस्क प्रदीप शुक्ला
॥ श्रीजगन्नाथाष्टकम् ॥
जय जगन्नाथ!
जय नीलाचलाधिपति!
कबहुँ कालिंदी कूल वनन में, गावत मधुर विहाग।
गोपिन संग रस-रंग रचावत, मन हरि लेत अनुराग॥
जिनके मुख-पंकज निहारि कै, हरषैं सुर नर नाग।
जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी, भव-भय हरहु अभाग॥
लै मुरली कर बाम बिराजैं, सिर मोरन की छाँह।
पीताम्बर तन सोहै सुंदर, चितवत सखियन माह॥
नित वृंदावन कुंजन भीतर, रचैं प्रेम की राह।
जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी, राखहु अपनी चाह॥
महासिंधु के तीर विराजत, नीलाचल सुखधाम।
बलभद्र भैया संग सुहावन, सुभद्रा मध्य ललाम॥
जहँ सुर-मुनिजन सेवा करत हैं, जपत तुम्हारो नाम।
जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी, पूरहु सबके काम॥
करुणा-सागर, घन-श्यामल तन, रूप अनूप अपार।
लक्ष्मी, ब्रह्मा, शंकर, शारदा, गावैं गुण विस्तार॥
वेद पुरान अनादि काल से, करैं तुम्हारो सार।
जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी, भवसागर के पार॥
रथ पर चढ़ि जब नगर निहारौ, उमड़ै भक्त समाज।
जय-जयकार गगन मँ गूँजै, मिटै सकल संताप॥
दीन-अनाथन पर कृपा बरसावौ, सुनि सबकी फरियाद।
जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी, तुम बिन कौन सहाय॥
परब्रह्म स्वरूप तुम्हारो, कमलन-से दो नैन।
नीलगिरि के मुकुटमणि तुम, हरौ जनन के चैन॥
राधा-माधव प्रेम-रसामृत, बरसै दिन अरु रैन।
जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी, बसहु हृदय के भैन॥
नाहिं चाहौं राज-पाट प्रभु, नहिं चाहौं धन-धान।
नाहिं चाहौं स्वर्ग-सुख सुन्दर, नहिं मणि-मुक्ता खान॥
बस इतनो वर दीजै मोहे, रहै चरणन मँ ध्यान।
जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी, यही मोरी पहचान॥
हे जगबन्धु, दीनदयाला, हरहु सकल संताप।
हे यादवकुल-तिलक कृपानिधि, काटहु भव के पाप॥
हम अति दीन, अनाथ, शरणागत, राखहु अपनी छाप।
जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी, करहु कृपा प्रताप॥
# फलश्रुति
जो नर-नारी प्रेम सहित यह, अष्टक करैं बखान।
शुद्ध हृदय सों नित्य सुनैं वा, धरैं प्रभु का ध्यान॥
तिनके पाप नाश सब होइहैं, निर्मल होइहैं प्राण।
अंत समय श्रीहरि पद पावैं, मिलै दिव्य सम्मान॥
भक्ति बढ़ै, मन शान्ति पावै, मिटै मोह-अभिमान।
जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी, राखैं निज सम्मान॥
# समर्पण
हे श्रीजगन्नाथ महाप्रभु!
ना मोहे सिद्धि, ना मोहे निधि, ना मोहे जग सम्मान।
तुम बिन सूना सब संसारन, तुम ही मोरे प्राण॥
मैं शब्द, तुम अर्थ प्रभु, मैं स्वर, तुम संगीत।
मैं दीपक की लौ अल्प, तुम अनन्त ज्योति पुनीत॥
बस इतनी अरज हमारी, सुन लीजै भगवान—
"जगन्नाथ स्वामी नयन-पथ गामी भवतु मे"।
जय जगन्नाथ!
जय बलभद्र!
जय माता सुभद्रा!
हरि बोल! 🙏🌺🚩
