NEET की शिक्षा में 'तथ्यों की हत्या': जब कोचिंग माफिया लाखों बच्चों के भविष्य का सौदा करे

 लखनऊ डेस्क प्रदीप शुक्ला 


NEET की शिक्षा में 'तथ्यों की हत्या': जब कोचिंग माफिया लाखों बच्चों के भविष्य का सौदा करे

यह सिर्फ तथ्यात्मक गलतियों का मामला नहीं है, यह शैक्षणिक धोखाधड़ी, नैतिक दिवालिएपन और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का एक भयावह उदाहरण है। 'फिजिक्सवाला' (PW) जैसी बड़ी एडटेक कंपनी पर लगे 2000 से अधिक खतरनाक तथ्यात्मक त्रुटियों के आरोप, जिसे वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. राजकुमार गुप्ता 2.5 साल से लगातार उठा रहे हैं, हमारे देश की कोचिंग संस्कृति के कटु सत्य को उजागर करते हैं: जहाँ लाभ का उद्देश्य, शिक्षा के मूल सिद्धांतों और लाखों छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रहा है। यदि हम अभी नहीं चेते, तो 2026 में लाखों NEET अभ्यर्थी केवल परीक्षा में असफल नहीं होंगे, बल्कि वे आत्मविश्वास और सपनों की हत्या का शिकार होंगे।

1. शैक्षणिक दृष्टिकोण: ज्ञान का जानबूझकर विरूपण

शिक्षा का मूल सिद्धांत सत्य और सटीकता पर आधारित है। NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षा, जो देश के स्वास्थ्य ढांचे की नींव रखती है, में मामूली त्रुटि भी अक्षम डॉक्टर पैदा कर सकती है।

 पाठ्यक्रम का जहर: जब C4 साइकल को उल्टा पढ़ाया जाता है, GFR का फॉर्मूला गलत होता है, और ब्रायोफाइट्स को वास्कुलर प्लांट बता दिया जाता है, तो यह केवल लापरवाही नहीं है—यह ज्ञान का जानबूझकर विरूपण (Willful Misrepresentation) है। यदि PW की सामग्री को पढ़कर बच्चा 720 में से 150-200 नंबर सीधे गँवा रहा है, तो यह स्पष्ट है कि कंपनी लाखों बच्चों को असफलता की गारंटी दे रही है।

 अकादमिक जवाबदेही की कमी: डॉ. गुप्ता जैसे वरिष्ठ प्रोफेसर द्वारा 600+ स्क्रीनशॉट और NCERT लाइन नंबर के साथ त्रुटियाँ बताने के बावजूद, PW प्रबंधन का आँखें मूंद लेना यह साबित करता है कि उनके लिए सामग्री की सटीकता से अधिक महत्वपूर्ण तेज़ बाज़ार विस्तार और राजस्व है। यह एडटेक क्षेत्र में अकादमिक बेईमानी का सबसे बड़ा उदाहरण है।

2. नैतिक और सामाजिक दिवालियापन: कॉर्पोरेट क्रूरता

यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि घोर नैतिक संकट का है।

 भविष्य की हत्या: लाखों युवा अपना सर्वश्रेष्ठ समय और माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई डॉक्टर बनने के सपने में निवेश करते हैं। गलत सामग्री के कारण जब ये बच्चे 600 के नीचे फंसते हैं, तो इसका सामाजिक परिणाम सिर्फ असफलता नहीं होता, बल्कि डिप्रेशन, मानसिक आघात और आत्महत्या की प्रवृत्ति तक बढ़ सकती है। यह नैतिक रूप से करोड़ों की ठगी है, क्योंकि कंपनी बच्चों के भविष्य को जानबूझकर अंधेरे में धकेल रही है।

 सामूहिक धोखे का सिंडिकेट: जब हिंदी, इंग्लिश, बंगाली, कन्नड़, तेलुगु – हर भाषा में और PW IAS जनरल साइंस के वीडियो तक में एक जैसी गलतियाँ दोहराई जाती हैं, तो यह लापरवाही नहीं, बल्कि एक मानकीकृत, जानबूझकर की गई धोखा प्रणाली (Systematic Deception) है।

3. संवैधानिक और विधिक दृष्टिकोण: कानून से ऊपर कौन?

इस पूरे प्रकरण में सबसे तीखा और संवैधानिक प्रश्न यह है कि कोचिंग माफिया खुद को कानून से ऊपर क्यों मान रहा है?

उपभोक्ता संरक्षण और धोखाधड़ी: PW का यह कृत्य उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत स्पष्ट रूप से अनुचित व्यापार व्यवहार और धोखाधड़ी (Fraud) के दायरे में आता है। बच्चों को जानबूझकर गलत सामग्री बेचना, उनके भविष्य को दांव पर लगाना, आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) का मामला बनता है।

 संवैधानिक न्याय का अभाव: डॉ. गुप्ता द्वारा शिक्षा मंत्रालय, UGC, NTA और साइबर सेल में शिकायत करने के बावजूद FIR तक दर्ज न होना दर्शाता है कि कैसे धन और प्रभाव कानून के पहियों को जाम कर सकते हैं। यह संविधान द्वारा प्रदत्त 'कानून के समक्ष समानता' के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है। यदि एक साधारण नागरिक ऐसी धोखाधड़ी करे, तो तत्काल कार्रवाई होती, लेकिन एक अरबों की कंपनी को 'अंधा-बहरा' बने रहने की छूट क्यों मिल रही है?

 शिक्षा के अधिकार पर हमला: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना (यहां तक ​​कि कोचिंग में भी) छात्रों का संवैधानिक अधिकार है, जो जीवन के अधिकार अनुच्छेद 21 से जुड़ा हुआ है। गलत सामग्री प्रदान करना इस अधिकार पर सीधा हमला है।

# अब बहिष्कार, रिफंड और जवाबदेही

यह अंतिम चेतावनी है। अगर आज नागरिक समाज चुप रहा, तो 2026 में लाखों बच्चों का भविष्य तबाह हो जाएगा।

# अलख पांडे और PW प्रबंधन को तत्काल कार्रवाई करनी होगी:

1. सार्वजनिक इकरार और माफी: सभी गलत किताबें, मॉड्यूल और वीडियो तुरंत वापस लिए जाएँ।

2. पूर्ण रिफंड: PW के सभी बैचों के छात्रों को तत्काल पूरा रिफंड दिया जाए।

3. सुधार और पुनर्वास: तीन महीने के भीतर विशेषज्ञों की निगरानी में सही सामग्री तैयार की जाए और सभी छात्रों को मुफ्त प्रदान की जाए।

जब तक यह नहीं होता, PW का पूर्ण बहिष्कार ही एकमात्र नैतिक विकल्प है। अभिभावकों, छात्रों और शिक्षकों को सब्सक्रिप्शन कैंसिल कर, इन किताबों को विरोध के रूप में त्याग कर, यह संदेश हर मंच पर पहुंचाना होगा कि बच्चों के भविष्य से सौदा करने वाले कोचिंग माफिया को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लाखों जिंदगियों को बचाना, आज हम सबकी सबसे बड़ी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है।