क्रांतिकारी राजा हृदय शाह लोधी के बारे में

 

राजा हृदय शाह लोधी (हृदय साह) मध्य भारत के एक महान क्रांतिकारी और बुंदेला विद्रोह के प्रमुख नायक थे। राजा हृदय शाह लोधी ने 1842 के बुंदेला विद्रोह में #अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था।

उन्होंने हीरापुर रियासत से विद्रोह का बिगुल फूँका और अपनी छोटी सी सेना के साथ विशाल ब्रिटिश फौज को चुनौती दी।

अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए उस दौर में हजारों रुपयों का इनाम घोषित किया था, जो उनकी शक्ति का प्रमाण था।

उन्होंने नरसिंहपुर, सागर और दमोह के क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ छापामार युद्ध नीति का अद्भुत प्रयोग किया।

हृदय शाह न केवल एक योद्धा थे, बल्कि जनता के बीच 'न्यायप्रिय राजा' के रूप में प्रसिद्ध थे।

उनकी रणनीति इतनी सटीक थी कि अंग्रेज सेनापति उनके नाम से ही खौफ खाते थे।

उन्होंने अपनी रियासत के #स्वाभिमान के लिए महलों का सुख त्याग कर जंगलों में रहना स्वीकार किया।

उनकी वीरता ने रानी लक्ष्मीबाई जैसे आगामी #क्रांतिकारियों के लिए विद्रोह की नींव तैयार की थी।

गद्दारी और घेराबंदी के बावजूद उन्होंने अंतिम सांस तक फिरंगियों की गुलामी स्वीकार नहीं की।

आज भी #लोधी_समाज और संपूर्ण भारत उन्हें क्रांति के अमर पुरोधा के रूप में गर्व से याद करता है।