वैश्विक धरोहर शांतिनिकेतन: टैगोर के 'प्राण आराम' में विरासत की पदयात्रा अब हफ्ते में छह दिन

 लखनऊ डेस्क प्रदीप शुक्ला


वैश्विक धरोहर शांतिनिकेतन: टैगोर के 'प्राण आराम' में विरासत की पदयात्रा अब हफ्ते में छह दिन

शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) : मानवतावाद, कला और प्रकृति के अनूठे संगम स्थली—शांतिनिकेतन—ने वैश्विक कला-प्रेमियों और पर्यटकों के लिए अपने द्वार और अधिक विस्तृत कर दिए हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित और यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शुमार इस अद्वितीय आश्रम परिसर में अब 'हेरिटेज वॉक' (विरासत पदयात्रा) सप्ताह में तीन दिनों के बजाय छह दिन आयोजित की जाएगी। विश्वभारती विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा लिया गया यह निर्णय ८ जून २०२६ से प्रभावी होने जा रहा है।

विश्वभारती के जनसंपर्क अधिकारी अतिग घोष ने इस ऐतिहासिक निर्णय की आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा, "हम इस वैश्विक विरासत को अधिक से अधिक लोगों, शोधकर्ताओं और कला-जिज्ञासुओं के समक्ष खोलना चाहते हैं। सुरक्षा और संरक्षण के उच्चतम मानकों को ध्यान में रखते हुए यह नई समय-सारणी तैयार की गई है, ताकि आगंतुक टैगोर के दर्शन और उनकी कालजयी रचनाभूमि को और करीब से महसूस कर सकें।"


## धरोहर की वीथियों में समय का संयोजन


नवीनतम विधिक और प्रशासनिक दिशानिर्देशों के अनुसार, केवल गुरुवार (विश्वभारती का पारंपरिक साप्ताहिक अवकाश) को छोड़कर, पर्यटक हर दिन इस पावन परिसर की धूल को छू सकेंगे। प्रबंधन ने इसके लिए एक सुविचारित समय-सारणी (Time-Table) निर्धारित की है:


* सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार और शनिवार: अपराह्न ०३:३० बजे से शाम ०४:३० बजे तक।

* बुधवार: पूर्वाह्न ११:०० बजे विशेष सत्र, तथा पुनः अपराह्न ०३:३० से ०४:३० बजे तक।

* रविवार (विशेष विमर्श सत्र): पूर्वाह्न १०:०० और ११:०० बजे, तथा अपराह्न ०३:३० और ०४:३० बजे।


यात्रा को सुचारू और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने के लिए प्रति समूह अधिकतम २५ पर्यटकों की सीमा तय की गई है। इसके प्रवेश टिकट फिलहाल ऐतिहासिक 'रवीन्द्र भवन संग्रहालय' के काउंटर से भौतिक रूप से प्राप्त किए जा सकते हैं, जिसे शीघ्र ही वैश्विक दर्शकों के लिए ऑनलाइन करने की योजना है।


## सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक वर्गीकरण


१७ सितंबर २०२३ को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित होने के बाद, शांतिनिकेतन वर्तमान में दुनिया का एकमात्र ऐसा कार्यात्मक (Functional) विश्वविद्यालय है, जो इस गौरवशाली उपाधि से अलंकृत है। यहाँ की स्थापत्य कला, रामकिंकर बैज की जीवंत मूर्तियां, और नंदलाल बोस के भित्तिचित्रों को सहेजना वैश्विक संस्कृति के लिए एक बड़ी चुनौती है।


इस धरोहर के रख-रखाव और विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रबंधन ने एक बहुस्तरीय विनिमय दर (Fee Structure) लागू की है:


| श्रेणी (पर्यटक वर्ग) | शुल्क प्रति | उद्देश्य व दृष्टिकोण |

                                             व्यक्ति |

| अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक। | ₹ १,००० | वैश्विक सांस्कृतिक पर्यटन 

                                                          को बढ़ावा देना |

| घरेलू भारतीय पर्यटक। | ₹ ३०० | राष्ट्रीय स्तर पर विरासत की 

                                                         समझ विकसित करना |

| एकल छात्र (Student) | ₹ १५० | शैक्षणिक शोध और विमर्श 

                                                          हेतु सुलभता |

|छात्रों का समूह (Group)| ₹ ५० | युवा पीढ़ी में टैगोर के दर्शन  

                                      (प्रति छात्र)| का बीजारोपण |


## परंपरा और आधुनिकता का सेतु


लाल माटी के इस प्रांगण में, जहाँ कभी 'छातितला' के नीचे महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने ध्यान लगाया था और जहाँ गुरुदेव ने 'ओपन-एयर एजुकेशन' (खुली हवा में शिक्षा) का वैश्विक मॉडल गढ़ा था, वहाँ छह दिनों की यह हेरिटेज वॉक महज एक पर्यटन गतिविधि नहीं है। यह वैश्विक मंदी, युद्ध और वैचारिक बिखराव से जूझ रही इक्कीसवीं सदी की दुनिया को टैगोर के उस शांति-मंत्र से दोबारा जोड़ने का एक सांस्कृतिक सेतु है, जिसे उन्होंने 'विश्वभारती' (जहाँ संपूर्ण विश्व एक घोंसले में समा जाता है) कहा था।


अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के लिए, शांतिनिकेतन की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) को अनुभव करने का यह एक अभूतपूर्व और अधिक सुलभ अवसर है।