फर्रुखाबाद में गाजी अब्बास का अलम बरामद,जुलूस में अकीदतमंदों ने नौहे पढ़े और मातम किया
फर्रुखाबाद में गाजी अब्बास का अलम बरामद,जुलूस में अकीदतमंदों ने नौहे पढ़े और मातम किया
रेहान ख़ान ब्यूरो चीफ फर्रुखाबाद 9452755077
फर्रुखाबाद में दूसरी मोहर्रम पर गाजी हजरत अब्बास का अलम बरामद किया गया। गुरुवार शाम 7:30 बजे सुनहरी मस्जिद के सदर मुनव्वर हुसैन के नेतृत्व में लाल सराय स्थित मस्जिद से यह अलम निकाला गया। इस दौरान जुलूस में अकीदतमंदों ने नौहे पढ़े और मातम किया।
अंजुमन शमशीरे हैदरी के शायबे बयाज नयाब आब्दी ने कलाम पढ़ा। शिया धर्मगुरु मौलाना सैय्यद फरहत अली ज़ैदी ने अपने बयान में कहा कि दूसरी मोहर्रम को नवासे रसूल इमाम हुसैन का काफिला कर्बला पहुंचा था।
मौलाना ज़ैदी ने बताया कि इमाम हुसैन जुल्म मिटाने और शरीअते मोहम्मदी बचाने आए थे, जिसके परिणामस्वरूप आज हुसैन का नाम जीवित है और यज़ीद का नामो निशान मिट गया।
जुलूस घुमना नेहरू रोड, चौक चौराहा, किराना बाजार, पक्कापुल चौराहा, तिकोना चौराहा और टाउन हॉल तिराहा से होते हुए रकाबगंज कला स्थित दरगाह मौला हजरत अब्बास के रौजे पर समाप्त हुआ। यहां मौलाना सैयद सदाकत हुसैन ने मजलिस को संबोधित किया।
इस अवसर पर सीओ सिटी अभय वर्मा, शहर कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र सिंह, थाना प्रभारी अजब सिंह, एसआई वीरेंद्र सिंह और एसआई इमरान फरीद सहित पुलिस बल मौजूद रहा।
आल इंडिया शिया मुस्लिम महासभा के जिलाध्यक्ष सैय्यद अम्मार अली ज़ैदी, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष आफ़ताब हुसैन, कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष नफीस हुसैन, सुनहरी मस्जिद के सदर मुनव्वर हुसैन और हुसैनी टाइगर के जिलाध्यक्ष मुन्तज़िर हुसैन ज़ैदी, मेराज हुसैन, टीटू रिजवी, शादाब जैदी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद भी उपस्थित थे।
जुलूस में शामिल अकीदतमंद देर रात तक नौहे और मरसिये पढ़ते हुए मातम करते रहे। मुहर्रम की शुरुआत के साथ ही शिया समुदाय के लोगों ने काले वस्त्र धारण कर शोक व्यक्त करना शुरू कर दिया था।
मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली ने मजलिस को संबोधित करते हुए इराक में शब-ए-आशूर के वाकये का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हजरत इमाम हुसैन और उनके छह महीने के बेटे अली असगर सहित 70 अन्य लोगों को शहीद कर दिया गया था।
मौलाना ने आगे कहा कि यजीदी फौज का जुल्म यहीं खत्म नहीं हुआ, उन्होंने पैगंबर मोहम्मद साहब के घराने की महिलाओं के तंबुओं में आग लगा दी, जिसमें बच्चे भी शहीद हुए। यह सुनकर वहां मौजूद महिलाएं, बच्चे और पुरुष सभी भावुक हो गए।
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