इटावा: शहीदाने कर्बला एवं इमाम हुसैन की याद में उठाए गए ताजिए

 मोहम्मद आमीन भाई

शहीदाने कर्बला एवं इमाम हुसैन की याद में उठाए गए ताजिए

स्थानीय कर्बला वाइस ख्वाजा में नम आंखों और या अली या हुसैन के गगन भेदी नारों के साथ किए गए सुपुर्दे खाक

अक़ीदत मंदों ने लंगर व तवर्रूक वितरण किया

ताजियादारों,अलम,जुल्फिकार उठाने वालों ने अपने-अपने जुलूसो की व्यवस्था प्रशासन की देखरेख में की

इटावा। हजरत इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की याद में उठाए गए ताजियों, अलम,चौकियों, जुल्फिकारों के उठने का सिलसिला दस मोहर्रम अशुरा को या अली या हुसैन की गगन भेदी नारों के साथ गमगीन माहौल में संपन्न हुए।


इससे पूर्व इमामबाड़ों, इमाबारगाहों, मे कुरानख्वानि, जिर्केशाहदतेन व मजलिसों का आयोजन हुआ।

    विभिन्न इमामबाडों, इमामबारगाहों से ताजियों के जुलूस उठने का क्रम जारी हुआ और सभी ताजिया,जुल्फिकार स्थानीय रामगंज चौराहा पर एकत्रित हुए जहां पर बारह अखाडों के उस्ताद और खलीफाओं ने अपने-अपने शिष्यों के साथ इमाम हुसैन व शहीदाने कर्बला को सलामी पेश की।

 यहां से ताजियों,अलमों जुल्फिकारों का काफिला कर्बला की ओर रवाना हुआ रास्ते में विभिन्न जगहों पर लंगर के स्टॉल लगे हुए थे।

  मेवाती मोहल्ला उर्दू मोहल्ला नौरंगाबाद पक्का तालाब से सफेद पन्नी व अवरक पर कर्बला के तुरगों पर महीन नक्कासी की गई थी।

 उर्दू मोहल्ला,पथवरिया, दवग्रान मैं प्लास्टिक के ताजिए बनाए गए थे।

 कटरा पुर्दल खाँ से हँस की चोंच वाला ताजिया,ख़डी का सफ़ेद ताजिया, के अलावा मोर का ताजिया आकर्षक के मुख्य केंद्र थे।

  मोहल्ला रामगंज इमामबाड़ा से चांदी का शीशे की छतरी वाला ताजिया,कबीरगंज, पचराहा,शाहकमर, उझेदीं, मकसूद पुरा, कसाब खाना, गाड़ीपूरा,कटरा सेवाकली,सराय तबेला, कूँचा शीलचंद, सावितगंज,शाहगंज, दरीबालान, नई बस्ती आदि मोहल्ले से भी ताजिया उठाए गए।

  जुलूस की देखरेख में मुख्य रूप से कौमी तहफ्फुज कमेटी के संयोजक खादिम अब्बास, हाजी फजल युसूफ,व्यापार मंडल के अध्यक्ष आशीष दीक्षित,पूर्व चेयरमेन फुरकान अहमद, इंसानी भाईचारा समिति के अध्यक्ष मोहम्मद आमीन भाई, पंजाब केसरी व्यूरों चीफ मसूद तैमूरी, सैफ तैमूरी, ऑल इंडिया उलेमा व मशाईख बोर्ड यूनिट इटावा के जिला अध्यक्ष हाजी शेख शकील अहमद, साजिद वारसी,एडवोकेट अज़रुद्दीन, कामिल कुरैशी, शाहनवाज़ आलम, खुर्शीद आलम, इमरान अहमद आदि का विशेष योगदान रहा। प्रशासन की व्यवस्था भी बहुत ही सराहनीय रही।

   इस जुलूस मे सभी वर्गों और धर्मों के लोगों ने हिस्सा लिया। गंगा जमुनी साझा संस्कृति के जगह जगह दर्शन हुए।