इटावा/जसवंतनगर: श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, मां-बेटे ने कन्याओं को भेंट किए टिफिन व दक्षिणा

 चीफ एडिटर: एम.एस वर्मा

मनोज कुमार

श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, मां-बेटे ने कन्याओं को भेंट किए टिफिन व दक्षिणा

आदित्य उर्फ अनु और उनकी मां रत्नेश ने कलश यात्रा में शामिल कन्याओं का किया सम्मान, सातवें दिन कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

भागवत श्रवण से जीवन में आता है सकारात्मक परिवर्तन : पं. जितेंद्र शास्त्री

जसवतनगर। मोहल्ला कोठी कैस्त में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास पंडित जितेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया।

कथा के दौरान उन्होंने श्रीमद्भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत श्रवण से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा ईश्वर के प्रति आस्था और समर्पण की भावना प्रबल होती है। रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं युवा श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा का रसपान किया। भजन-कीर्तन और जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

यज्ञ में यजमान की भूमिका महानानंद एवं श्रीमती रामादेवी ने निभाई, जबकि परीक्षित की भूमिका में आनंद कुमार एवं श्रीमती सुमन देवी उपस्थित रहीं। आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।

इस अवसर पर कलश यात्रा में शामिल किशोरियों और महिलाओं का विशेष सम्मान किया गया। आदित्य उर्फ अनु तथा उनकी मां रत्नेश ने कलश धारण करने वाली कन्याओं को टिफिन और दक्षिणा भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्याओं को देवी स्वरूप माना जाता है और उनका सम्मान करना पुण्य का कार्य है।

कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने यज्ञ एवं कथा की पूर्ण सफलता के लिए प्रार्थना की। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी धार्मिक कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। कथा स्थल पर देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही।

फोटो :कलश यात्रा में शामिल कन्याओं को टिफिन व दक्षिणा देकर सम्मानित करते आदित्य उर्फ अनु, उनकी मां रत्नेश एवं अन्य।