नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित आत्मकथा लीक मामले में दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR।
लखनऊ डेस्क प्रदीप शुक्ला
पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित आत्मकथा लीक मामले में दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR, राष्ट्रीय सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस तेज़
नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के अनधिकृत ऑनलाइन प्रसार के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह कार्रवाई पुस्तक के प्री-प्रिंट संस्करण के इंटरनेट पर लीक होने की सूचना मिलने के बाद की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पुस्तक के प्रकाशन के लिए अभी आधिकारिक अनुमति नहीं मिली थी, इसके बावजूद इसका टाइपसेटेड PDF संस्करण सोशल मीडिया और कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध पाया गया।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे सोशल मीडिया, समाचार वेबसाइटों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जानकारी मिली कि पुस्तक का एक प्री-प्रिंट संस्करण सार्वजनिक रूप से साझा किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ ई-कॉमर्स और मार्केटिंग वेबसाइटों पर पुस्तक का अंतिम कवर पेज प्रदर्शित किया जा रहा था, जिससे यह आभास हो रहा था कि पुस्तक बिक्री के लिए उपलब्ध है।
प्रकाशक की भूमिका और कॉपीराइट उल्लंघन की आशंका
जांच में सामने आया है कि यह पुस्तक प्रतिष्ठित प्रकाशन समूह पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रकाशित की जानी थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि प्रकाशक के आंतरिक तंत्र से प्री-प्रिंट सामग्री कैसे बाहर आई और क्या यह कॉपीराइट कानूनों एवं प्रकाशन समझौतों का उल्लंघन है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अनधिकृत प्रसार केवल बौद्धिक संपदा का मामला नहीं, बल्कि संभावित रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और आधिकारिक गोपनीयता से भी जुड़ा हो सकता है
विशेष प्रकोष्ठ को सौंपी गई जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए FIR दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम या स्पेशल सेल प्रकोष्ठ में दर्ज की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि PDF फ़ाइल किस स्तर से लीक हुई, इसे किसने अपलोड किया और क्या इसके पीछे कोई संगठित डिजिटल नेटवर्क सक्रिय है। डिजिटल फॉरेंसिक टीम PDF के मेटाडेटा, अपलोड लोकेशन, आईपी एड्रेस और फ़ाइल के प्रसार की श्रृंखला की गहन जांच कर रही है। इसके साथ ही संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से डेटा साझा करने और सामग्री हटाने का अनुरोध किया गया है।
# संसद विवाद से जुड़ा राजनीतिक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब एक सप्ताह पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संसद परिसर में कथित तौर पर इस पुस्तक की एक प्रति पकड़े जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। उस घटना के बाद लोकसभा में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह पूर्व सेना प्रमुख की पुस्तक से जुड़ी जानकारी को दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर उल्लंघन बताया था। इस विवाद के चलते लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई और बजट सत्र के दौरान आठ सांसदों को निलंबित भी किया गया।
# राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
पूर्व सेना प्रमुख की यह आत्मकथा उनके 2019 से 2022 के कार्यकाल से संबंधित बताई जा रही है, जिसमें भारत-चीन सीमा पर तनाव, गलवान घाटी की घटनाओं और सैन्य-रणनीतिक निर्णयों से जुड़े संदर्भ होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में बिना आधिकारिक अनुमति के इसके लीक होने को सुरक्षा एजेंसियां गंभीर जोखिम के रूप में देख रही हैं।
हालांकि, इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर भी नई बहस को जन्म दिया है। पुलिस जांच के निष्कर्षों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह लीक जानबूझकर किया गया था या प्रशासनिक एवं प्रकाशन प्रक्रिया में हुई लापरवाही का परिणाम है।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने पुस्तक की अनधिकृत डिजिटल प्रतियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और दोषियों की पहचान होने पर उनके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
