जसवंतनगर/इटावा: शुभ भावों से स्वर्ग, अशुभ भावों से निगोद का बंधन : मुनि श्री विश्वास सागर महाराज।

 चीफ एडिटर: एम.एस वर्मा

मनोज कुमार

शुभ भावों से स्वर्ग, अशुभ भावों से निगोद का बंधन : मुनि श्री विश्वास सागर महाराज।

जसवंतनगर/इटावा। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा के दौरान मुनि श्री 108 विश्वास सागर जी महाराज ने भावों की महिमा पर विस्तार से प्रवचन दिया। 

                 उन्होंने कहा कि मानव जीवन की दिशा और दशा का निर्धारण व्यक्ति के भावों से ही होता है।मुनि श्री ने बताया कि शुभ भावों से स्वर्ग की प्राप्ति होती है, जबकि अशुभ भावों से निगोद का बंधन होता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहता है तो उसे सदैव उत्कृष्ट और शुद्ध भावनाएँ धारण करनी चाहिए।

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उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि किसी के प्रति बुरा न सोचें तथा संपूर्ण विश्व के कल्याण की भावना अपने हृदय में रखें, क्योंकि जब व्यक्ति सबके हित की कामना करता है, तभी उसका स्वयं का कल्याण संभव हो पाता है। 

              प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने मुनि श्री के उपदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।