SIR का व्यापक असर अवैध लोगों को छोड़ना होगा देश।
.चीफ एडिटर: एम.एस वर्मा, 6397329270
लेकिन, बंगाल में क्या ये सफल हो पाएगी क्योंकि BLO तो राज्य सरकार के कर्मचारी ही होते हैं.
और, बंगाल की सरकार तो तुम जानबे करते हो..!
उसकी बातें सुनकर पहले तो मैं उसे 5 सेकेंड तक नजर गड़ा कर देखा जिसके उपरांत उसके भोलेपन पर मुझे हँसी आ गई.
फिर मैंने उसे बताया कि... SIR में असल में BLO का कोई रोल नहीं होता है.
उनका काम सिर्फ मतदाता को सहयोग पहुँचाना यथा उसे फॉर्म देना और फॉर्म (और साथ में अगर कोई डॉक्यूमेंट हो तो) कलेक्ट करना है.
अब अगर BLO पक्षपाती हो या एरिया में जाए ही नहीं तो इससे चुनाव आयोग अथवा केंद्र सरकार का भला क्या बिगड़ना है ?
इसे बैंक का KYC अथवा अपने मोबाइल के सिम का KYC समझ लो.
समझ लो कि बैंक ने आपको एक मैसेज भेज दिया कि हम आपका अकॉउंट फ्रीज कर रहे हैं.
अगर आपको अपना अकॉउंट फिर से चालू (एक्टिव) करवाना हो तो बैंक आकर अपना KYC करवा लें.
अब मर्जी तुम्हारी है कि तुम ब्रांच जाओ या न जाओ.
अगर तुम्हें अपना अकॉउंट चालू रखना है तो तुम्हें ब्रांच जा कर अपना KYC करवाना ही होगा..भले ही खुद तुम्हारे पापा जी ही ब्रांच मैनेजर क्यों न हो.
लगभग यही हाल मोबाइल सिम का भी है.
क्योंकि, काम आदमी नहीं बल्कि सिस्टम काम करता है.
अगर तुम मांगे गए डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं करवाते हो और न फॉर्म भरते हो तो सिस्टम ऑटोमेटिक लिस्ट से तुम्हारा नाम रिमूव कर देगा.
इसमें न तो लोकल BLO का कोई हाथ रहता है न ही किसी SDM (जो कि अपने इलाके का चुनाव अधिकारी होता है) के हाथ में.
ये सब काम सिस्टम खुद ही करता है.
इसीलिए, यदि खुद BLO अथवा SDM को भी वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखना है तो उन्हें भी उतने ही प्रोसेस करने होंगे जितना कि हमें या तुम्हें करने हैं.
इसीलिए, SIR में कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप पक्षपाती हो, घूसखोर हो या किसी पार्टी के कार्यकर्ता अथवा अध्यक्ष ही क्यों न हो.
नियम एकदम साफ है..
BLO को सिर्फ फॉर्म बांटना है और मतदाता द्वारा वापस दिए गए फॉर्म को अपने सिस्टम में अपलोड कर देना है.
बाकी का काम दिल्ली में बैठे चुनाव आयोग का है.
चुनाव आयोग सभी पाए दस्तावेजों की स्क्रूटनी करेगा और उसे वेरिफाई करेगा.
अगर सब कुछ सही रहा तो आपका नाम मतदाता सूची में जुड़ा रहेगा और अगर दस्तावेज कम पड़े तो मोबाइल में एक मैसेज आ जायेगा कि आप फलानी तारीख को हमारे फलाने ऑफिस में फलाने-फलाने डाक्यूमेंट्स जमा करवा दें.
इसके बाद अगर आपने जमा करवा दिया तो बहुत अच्छा.
और अगर नहीं करवाये तो फिर... अपना जय श्री राम समझो.
ऐसी स्थिति में आपको कोई पूछने नहीं आएगा कि मालिक आपने अपना डाक्यूमेंट्स क्यों नहीं जमा करवाया ?
अरे हाँ... अगर किसी ने होशियारी झाड़ते हुए कोई गलत डॉक्यूमेंट भी जमा करवा दिए तो भी BLO किसी को कुछ नहीं करने जा रहा है या कोई आपत्ति दर्ज करने जा रहा है.
क्योंकि, BLO के पास दस्तावेजों को प्रमाणित अथवा रिजेक्ट करने का कोई संसाधन ही नहीं है.
ऐसी स्थिति में जो करेगा वो दिल्ली में बैठा चुनाव आयोग करेगा क्योंकि SIR में फर्जी दस्तावेज जमा कर फर्जीवाड़ा करने वालों के लिए 1 साल की सजा निर्धारित की गई है.
बाकी, फर्जी डाक्यूमेंट्स बनाने का केस जो चलेगा वो अलग से..
जिसकी सजा IAF 2025 (Immigration and Foreigners act 2025) के तहत 10 लाख का जुर्माना और कमर में रस्सा बांध कर डिपोर्टेशन तक है.
इसीलिए, तुम एकदम निश्चिंत रहो कि... बंगाल हो या केरल..
नागालैंड हो या त्रिपुरा.
SIR एकदम अच्छे से निपट जाएगा.
क्योंकि, SIR के तहत सरकार को आपको बाहरी (घुसपैठिया) साबित नहीं करना है... जो कि सरकार पर कोई प्रेशर रहेगा.
बल्कि, SIR के तहत खुद आपको ही साबित करना है कि आप भारतीय हो और 2003 में भी आप अथवा आपके पापा या फिर आपके दादा-परदादा भारत में ही रहते थे और वोट भी डाला करते थे...!
इसके बाद मैं और मेरे मित्र दोनों हँसने लगे और हमारी बातचीत समाप्त हो गई..!

