PM CARES फंड: लोकतंत्र की केयर या तानाशाही की तैयारी।
लखनऊ डेस्क प्रदीप शुक्ला
PM CARES फंड: लोकतंत्र की केयर या तानाशाही की तैयारी।"Transparently opaque — that's how one might describe India's PM CARES Fund, a modern enigma of democracy in distress."
आपदा में अवसर, लेकिन किसके लिए?
मार्च 2020। भारत को बिना किसी पूर्व सूचना के एक ‘जनता कर्फ्यू’ और फिर पूर्ण लॉकडाउन में धकेल दिया गया। करोड़ों लोग अपनी आजीविका, घर और सुरक्षा गँवा बैठे। और इसी त्रासदी की आंधी में, प्रधानमंत्री ने एक नए ट्रस्ट की घोषणा की — "PM CARES Fund"।
कहने को यह जनता की “केयर” के लिए था, लेकिन यह "CARE" शब्द के पीछे छिपा था एक पूरा सिस्टम — Centralized Abuse of Resources and Ethics।
किसका फंड है यह? सरकार का, प्रधानमंत्री का या सत्ता का निजी खाता?
जब देश के सर्वोच्च न्यायालय में सवाल उठा कि इस फंड की पारदर्शिता कहाँ है, तो सरकार ने चौंकाने वाला उत्तर दिया — “यह सरकारी फंड नहीं है। यह एक निजी ट्रस्ट है।”
निजी?
जिस फंड में दान देने के लिए सरकारी दबाव था, जिसके प्रचार में प्रधानमंत्री की तस्वीरें और सरकारी प्रतीक चिन्ह (भारत सरकार का अशोक स्तंभ) थे। जिसका प्रचार सरकारी चैनलों और संसाधनों से हुआ, जिसके ट्रस्टी खुद प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री थे, वो प्राइवेट फंड कैसे हो सकता है?
इसका नाम 'PM CARES' है या 'PM CONCEALS'?
पारदर्शिता का पोस्टमॉर्टम
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इसे जानकारी देने से छूट मिली।
कैग ऑडिट से बाहर रखा गया, जबकि यह सरकार के शीर्ष प्रतिनिधियों द्वारा चलाया जा रहा है।
2021 के बाद कोई सार्वजनिक ऑडिट रिपोर्ट नहीं।
सिर्फ कहा गया कि इससे "वेंटिलेटर खरीदे गए", लेकिन कौन-से? कितने? किस कंपनी से? क्या उन्होंने काम किया? – कोई जवाब नहीं।
अगर यही कारनामा किसी NGO ने किया होता, तो ED और IT की टीमें उनके घरों के बाहर डेरा डाले बैठी होतीं।
अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक मानकों पर भारत का रिपोर्ट कार्ड: FAIL
ब्रिटेन में Prime Minister’s Fund जैसा कोई भी फंड संसद की निगरानी में होता।
अमेरिका में White House Relief Initiative भी Congressional Oversight के अधीन होता है।
जर्मनी जैसे देशों में Chancellor का कोई निजी आपदा फंड संवैधानिक रूप से अवैध माना जाएगा।
भारत में क्या हुआ?
सरकार ने एक ऐसा तंत्र खड़ा किया जो सरकार का नहीं, पर सरकार के सबसे ऊंचे पदाधिकारियों द्वारा संचालित है। इसे कहते हैं — "Absolute power with zero accountability."
Care की जगह Control: एक नई कार्यपालिका का नमूना
जब एक लोकतांत्रिक सरकार खुद को कानून से ऊपर समझने लगे, जब जनता के पैसे का हिसाब देने से इनकार कर दे, तो यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्तावादी बँधी-बंधाई तानाशाही होती है।
PM CARES फंड कोई साधारण वित्तीय धोखा नहीं, यह लोकतांत्रिक मूल्य प्रणाली का निर्ममता से शोषण है।
यह फंड नहीं, एक तंत्र है — जहाँ प्रश्न पूछना अपराध है, और पारदर्शिता एक कमजोरी।
क्या हो अब? — जनता की मांग और लोकतंत्र की ज़िम्मेदारी
1. RTI के तहत लाया जाए — कोई भी फंड जो सरकार के शीर्ष पदों से जुड़ा है, उसे गोपनीय नहीं बनाया जा सकता।
2. संसदीय जांच आयोग गठित हो — यह पता लगाने के लिए कि कितना पैसा आया, किसने दिया, और कहाँ खर्च हुआ।
3. कैग ऑडिट अनिवार्य हो — हर वर्ष, और सार्वजनिक रूप से।
4. दोषियों की पहचान और कानूनी कार्यवाही — यदि कोई वित्तीय अनियमितता सिद्ध होती है।
और अंत में एक चेतावनी:
“जब जनता CARES करना बंद कर देती है, तभी सत्ताएं CARELESS हो जाती हैं।”
PM CARES फंड इस देश की लोकतांत्रिक आत्मा पर एक तमाचा है। अगर आज इसे नहीं रोका गया, तो कल हर मंत्री, हर मुख्यमंत्री, हर नौकरशाह, अपने "निजी" फंड बनाकर जनता की गाढ़ी कमाई को संवैधानिक भ्रष्टाचार में बदल देगा।
समाप्ति से पहले एक सवाल :
"जब सरकार कहे – यह फंड “PM CARES” है, तो जनता को भी पूछने का हक़ है – CARES FOR WHOM? CARES FOR WHAT? AND WHO CARES ABOUT ACCOUNTABILITY?"