कलम की चुप्पी, देश की बर्बादी

 लखनऊ डेस्क प्रदीप शुक्ला 

कलम की चुप्पी, देश की बर्बादी

📌 जनता को सच कौन बताएगा?

मीडिया का काम जनता तक सच पहुँचाना था। सत्ता की लगाम हमेशा कलमकारों ने कसी थी। जनता नेताओं को राजनीति से ग्रसित मानती है, इसलिए भरोसा हमेशा पत्रकारों और लेखकों पर करती रही। पर आज यह भरोसा चकनाचूर है।

📌 मीडिया—धंधा, पत्रकार—दलाल

आज के मीडिया हाउस महज़ व्यापारिक घराने हैं। पत्रकार रोज़ी-रोटी की मजबूरी गिना सकते हैं, पर करोड़पति पत्रकार अगर चुप हैं, सत्ता के लिए झूठ बोलते हैं, तो वे पत्रकार नहीं—सत्ता के दलाल हैं।

📌 स्वतंत्रता संग्राम की कलम बनाम आज की कलम

आजादी की लड़ाई में कलमकारों ने इतिहास रचा था। आज वही कलमकार उदासीन, बिके हुए और समझौतावादी हैं। कलमकारों को जो सम्मान आज़ादी में मिला था, आने वाले समय में उतनी ही दुत्कार मिलेगी।

📌 अंधभक्त क्यों बने लोग?

 जनता भ्रमित है क्योंकि मीडिया ने आँखों पर पट्टी बाँधी।यदि अंधभक्त पैदा हुए हैं तो जिम्मेदार सत्ता नहीं, बल्कि सत्ता के तलवे चाटने वाले कलमकार हैं।

📌 जाति-धर्म की ठेकेदारी

कोई हिंदुओं का ठेकेदार बना है, कोई मुसलमानों का। कोई दलितों-ओबीसी का राग अलाप रहा है। पर देश, समाज और इंसानियत की बात कोई नहीं करता।

📌 ‘तीसरी अर्थव्यवस्था’—एक झूठा नारा

देश को तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बताने वाले छुपा रहे हैं कि पैसा चंद उद्योगपतियों के पास है। आम जनता बेरोज़गारी, कर्ज़ और महँगाई से त्रस्त है। विकास का नारा सिर्फ धोखा है।

📌 विदेश नीति—एक और भूल

ट्रंप को मित्र मानकर गलती हुई, अब वही भूल चीन और शी जिनपिंग को गले लगाकर दोहराई जा रही है। भारत अमेरिका-चीन की जाल में फँसने जा रहा है। संस्थाएँ लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर रहीं, बल्कि मोदी ब्रांडिंग मशीन बन चुकी हैं।

📌 विपक्ष—जनता से बेख़बर

विपक्ष भी सत्ता के लिए उतावला है, जनता की समस्याओं से पूरी तरह बेख़बर।

यदि अभी नहीं चेते तो यह मुट्ठीभर वर्ग पूरी पीढ़ी को मानसिक गुलाम बना देगा।

👉 आख़िरी चेतावनी

 आज देश को बचा सकती है केवल निडर और ईमानदार कलम।

कलमकार अगर अब भी चुप रहे तो वही भारत के लोकतंत्र की कब्र खोदेंगे।