जनता का घोषणापत्र : शासन-प्रशासन से पूछे जाने वाले अनिवार्य प्रश्न
लखनऊ डेस्क प्रदीप शुक्ला
जनता का घोषणापत्र : शासन-प्रशासन से पूछे जाने वाले अनिवार्य प्रश्न
1. पारदर्शिता और जवाबदेही
सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं का स्वतंत्र ऑडिट क्यों नहीं होता?
टैक्स के पैसों का वास्तविक उपयोग जनता को नियमित रूप से क्यों नहीं बताया जाता?
2. स्वतंत्र संस्थाओं की स्वायत्तता
चुनाव आयोग, CAG, CBI, ED जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता की गारंटी कौन करेगा?
क्या इन संस्थाओं पर राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने के लिए कोई ठोस कानून बनेगा?
3. जनगणना और डेटा पारदर्शिता
2021 की जनगणना अब तक क्यों नहीं हुई?
बेरोज़गारी, गरीबी, जाति और प्रवास के सटीक आँकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते?
4. शिक्षा और स्वास्थ्य
शिक्षा और स्वास्थ्य पर GDP का न्यूनतम प्रतिशत निर्धारित क्यों नहीं किया जाता?
सरकारी अस्पतालों और स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम कब उठेंगे?
5. बेरोज़गारी और युवाओं की स्थिति
सरकार हर साल कितनी नौकरियाँ पैदा कर रही है — इसकी पारदर्शी रिपोर्ट क्यों नहीं दी जाती?
भर्ती परीक्षाओं में धांधली और देरी रोकने के लिए क्या ठोस कदम हैं?
6. कृषि और किसान
MSP को कानूनी अधिकार कब मिलेगा?
किसान आत्महत्याओं और कृषि ऋणों पर ईमानदार रिपोर्ट क्यों नहीं आती?
7. आर्थिक असमानता और कॉर्पोरेट प्रभाव
बड़े उद्योगपतियों के कर्ज़ माफ क्यों किए जाते हैं, जबकि छोटे किसान/व्यापारी जेल में डाल दिए जाते हैं?
असमानता कम करने के लिए सरकार का ठोस मॉडल क्या है?
8. महिला सुरक्षा और समानता
निर्भया फंड का उपयोग अधूरा क्यों है?
महिलाओं को राजनीति और प्रशासन में 33% आरक्षण कब मिलेगा?
9. धर्म, राजनीति और समाज
संविधान की धर्मनिरपेक्ष आत्मा की रक्षा के लिए क्या ठोस उपाय हैं?
चुनाव में धर्म-जाति आधारित ध्रुवीकरण पर रोक क्यों नहीं लगती?
10. अल्पसंख्यक और हाशिए पर खड़े समाज
दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों की योजनाएँ कितनी जमीनी स्तर तक लागू हो रही हैं?
आरक्षण की समीक्षा और विस्तार पर स्पष्ट नीति क्यों नहीं है?
11. टेक्नोलॉजी और निजता
आधार और डिजिटल निगरानी के जरिए नागरिकों की निजता की सुरक्षा कौन करेगा?
क्या सरकार नागरिकों के डेटा को निजी कंपनियों से बचाने की गारंटी देती है?
12. राजनीतिक फंडिंग और चुनावी पारदर्शिता
चुनावी बांड में किसने किसको कितना फंड दिया — यह जानकारी छिपाई क्यों जा रही है?
राजनीतिक दलों की आय-व्यय का सार्वजनिक ऑडिट कब होगा?
13. न्यायपालिका और न्याय तक पहुँच
साधारण नागरिक को त्वरित और सस्ता न्याय क्यों नहीं मिलता?
लंबित मुकदमों की सुनवाई तेज करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे?
14. मीडिया की स्वतंत्रता
मीडिया की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए सरकार क्या करेगी?
सरकारी विज्ञापनों और कॉर्पोरेट दबाव से मुक्त मीडिया की गारंटी कब होगी?
15. भविष्य की दृष्टि और नीति
अगले 25 वर्षों के लिए भारत का विकास मॉडल क्या है — समाजवादी, पूँजीवादी या मिश्रित?
जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि और तकनीकी बेरोज़गारी जैसे संकटों के लिए क्या तैयारी है?
👉 यह प्रश्न केवल विरोध या आलोचना के लिए नहीं हैं।
ये लोकतंत्र को जीवंत रखने के लिए जनता का अधिकार और शासन-प्रशासन का कर्तव्य हैं।
जब तक ये प्रश्न नहीं पूछे जाते, लोकतंत्र अधूरा और सत्ता निरंकुश बनी रहेगी।