THAAD का संकट: जब गणित, तकनीक पर भारी पड़ जाए
लखनऊ डेस्क प्रदीप shukla
THAAD का संकट: जब गणित, तकनीक पर भारी पड़ जाए
१. इंटरसेप्टर का गणित: एक असंभव असंतुलन
मिसाइल डिफेंस का सबसे क्रूर सच यह है कि 'हमला सस्ता है और बचाव बहुत महंगा'। ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल की लागत कुछ लाख डॉलर हो सकती है, जबकि उसे रोकने वाले एक THAAD इंटरसेप्टर की कीमत लगभग 12-15 मिलियन डॉलर होती है।
* खपत बनाम उत्पादन: जैसा कि आपने उल्लेख किया, प्रति वर्ष 96 मिसाइलों का उत्पादन और एक सप्ताह में 500 मिसाइलों का हमला। यह एक ऐसी गणितीय खाई है जिसे कोई भी अर्थव्यवस्था लंबे समय तक नहीं भर सकती।
* इंटरसेप्शन रेशियो: $2:1$ का मानक अनुपात (एक लक्ष्य के लिए दो मिसाइल) रसद (Logistics) के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है।
२. रडार: रक्षा प्रणाली की 'अकिलीज़ हील' (कमजोरी)
THAAD का AN/TPY-2 रडार न केवल महंगा है, बल्कि यह पूरी प्रणाली का 'सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर' भी है।
* उत्पादन की जटिलता: एक रडार को बनाने में लगने वाले वर्षों का समय युद्ध की गति से मेल नहीं खाता। यदि जॉर्डन या यूएई जैसे रणनीतिक स्थानों पर ये रडार नष्ट होते हैं, तो अमेरिका के पास 'प्लग-एंड-प्ले' जैसा कोई विकल्प नहीं है।
* कवरेज गैप: रडार के बिना लॉन्चर केवल लोहे के डिब्बे हैं। एक रडार का गिरना पूरे क्षेत्र को दुश्मन की मिसाइलों के लिए 'खुला गलियारा' बना देता है।
३. रणनीतिक ओवरस्ट्रेच: दो मोर्चों का डर
यह बिंदु सबसे महत्वपूर्ण है। अमेरिका का रक्षा ढांचा एक साथ दो बड़े क्षेत्रीय युद्धों (खाड़ी और प्रशांत) को संभालने के सिद्धांत पर टिका है।
* चीन की नज़र: यदि ईरान के साथ संघर्ष में THAAD का 25-30% भंडार कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो जाता है, तो ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में चीन के खिलाफ प्रतिरोध (Deterrence) अपने आप कमजोर हो जाता है।
* लॉन्ग लीड टाइम: 2033 तक उत्पादन क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य वर्तमान संकट में बेमानी है। रक्षा उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) इतनी जटिल है कि उसे रातों-रात 'वॉर-फुटिंग' पर नहीं लाया जा सकता।
# क्या 'ढाल' की रणनीति बदलनी होगी?
ईरान-अमेरिका संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया की सबसे महंगी 'ढाल' भी संख्या बल के सामने चरमरा सकती है। यह स्थिति वाशिंगटन को अपनी रक्षा नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगी:
1. कीमत कम करना: क्या सस्ते इंटरसेप्टर बनाना संभव है?
2. वैकल्पिक तकनीक: क्या लेज़र-आधारित 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स' (जैसे Iron Beam) ही भविष्य हैं, जहाँ 'गोला-बारूद' खत्म होने का डर नहीं होता?
एक गंभीर प्रश्न: यदि उत्पादन की यही स्थिति रही, तो क्या अमेरिका अपने सहयोगियों (इजरायल, यूएई, सऊदी अरब) को निरंतर सुरक्षा की गारंटी दे पाएगा, या उसे 'चयनात्मक रक्षा' (Selective Defense) की नीति अपनानी होगी?
