फतेहपुर/उत्तर प्रदेश: फतेहपुर में सनातन परंपरा का महोत्सव : छह संतों का ऐतिहासिक पट्टाभिषेक, अखाड़ा परंपरा को नई दिशा
लखनऊ डेस्क प्रदीप शुक्ला
फतेहपुर में सनातन परंपरा का महोत्सव : छह संतों का ऐतिहासिक पट्टाभिषेक, अखाड़ा परंपरा को नई दिशा“जहाँ धर्म का दीप प्रज्वलित होता है, वहीं से राष्ट्र का प्रकाश प्रारंभ होता है। जहाँ साधना का संकल्प जागृत होता है, वहीं से युग परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।”
फतेहपुर, उत्तर प्रदेश : सनातन धर्म की अखंड परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति और वैदिक मर्यादाओं के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। श्री पंच दशनाम गुरुदत्त अखाड़ा द्वारा आगामी 1 अप्रैल 2026 को फतेहपुर जनपद स्थित इच्छापूर्ति गुरुदत्त आश्रम उमाशंकर धाम में भव्य "पट्टाभिषेक समारोह" का आयोजन किया जाएगा, जिसमें छह पूज्य संतों को उच्च आध्यात्मिक दायित्वों से विभूषित किया जाएगा।
इस आयोजन की घोषणा अखाड़े के संस्थापक एवं आचार्य महामंडलेश्वर अनिरुद्ध गिरि जी महाराज द्वारा की गई, जो इसे अखाड़ा परंपरा के अनुरूप वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न कराएंगे। यह समारोह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का उद्घोष माना जा रहा है।## छह संतों का अभिषेक : आध्यात्मिक नेतृत्व का विस्तार
इस ऐतिहासिक अवसर पर दो संतों को "राष्ट्रीय अध्यक्ष" तथा चार संतों को "महामंडलेश्वर" पद पर प्रतिष्ठित किया जाएगा। चयनित संतों में प्रमुख हैं—
* डॉ. भंवर लाल गिरि (उज्जैन, मध्य प्रदेश)
* शैलेंद्र गिरि
* लक्ष्मीकांत गिरि (मुंबई)
* मोहन गिरि (बिजनौर, उत्तर प्रदेश)
* कविता देवी (करनाल, हरियाणा)
इन संतों का अभिषेक अखाड़ा परंपरा की उस अखंड धारा को आगे बढ़ाएगा, जो तप, त्याग और सेवा के माध्यम से समाज को दिशा प्रदान करती आई है।
## संतों का सान्निध्य : राष्ट्रव्यापी आध्यात्मिक संगम
इस समारोह में देशभर से संत, महामंडलेश्वर एवं अखाड़ा प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। प्रमुख रुप से -
* उमाशंकर मिश्रा - संस्थापक श्री पंच दशनाम गुरुदत्त अखाड़ा फतेहपुर उत्तर प्रदेश
* साध्वी राधा गिरि - महिला प्रकोष्ठ राष्ट्रीय अध्यक्ष जालौन - उत्तर प्रदेश
* बाल कृष्णा गिरि - संरक्षक जबलपुर मध्य प्रदेश
* वरुण मिश्रा - राष्ट्रीय लेखा प्रभारी फतेहपुर उत्तर प्रदेश
* दर्शन गिर जी महाराज - महामंडलेश्वर कालका हरियाणा
* राम अवतार गिरी राष्ट्रीय प्रभारी कानपुर उत्तर प्रदेश
* मुकेश बारोट - राष्ट्रीय प्रभारी कच्छ भुज गुजरात
* सत्य गिरि - महामंडलेश्वर अमेठी उत्तर प्रदेश
* महेंद्र गिरी - महामंडलेश्वर कलोल गुजरात
* करुणानंद भारती - महामंडलेश्वर भरतपुर राजस्थान
* वीरेंद्र गिरि - महामंडलेश्वर पुष्कर राजस्थान
* सीता गिरी - महामंडलेश्वर इंदौर मध्य प्रदेश
* कौशल गिरि — सदस्य
सहित अनेक विद्वान संतों की उपस्थिति इस आयोजन को एक राष्ट्रीय आध्यात्मिक संगम का स्वरूप प्रदान करेगी।
## महामंडलेश्वर पद : परंपरा, त्याग और धर्मरक्षा का संकल्प
महामंडलेश्वर का पद केवल एक धार्मिक उपाधि नहीं, बल्कि सनातन धर्म की जीवंत धुरी है। यह पद उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने इतिहास के विभिन्न कालखंडों में धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए अग्रिम भूमिका निभाई।
महामंडलेश्वर वेदांत, योग और धर्मशास्त्र के ज्ञाता होते हैं। उनका जीवन स्वयं में एक संदेश होता है—संयम, सेवा और समर्पण का। वे केवल मठों के संचालक नहीं, बल्कि समाज के नैतिक मार्गदर्शक और आध्यात्मिक संरक्षक होते हैं।
## आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक आयोजन
फतेहपुर के इस पावन धाम में आयोजित होने वाला यह पट्टाभिषेक समारोह केवल एक परंपरागत अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक चेतना के पुनर्संवर्धन का उत्सव है। यह आयोजन उस सत्य को पुनः स्थापित करता है कि जब-जब समाज दिशा-भ्रमित होता है, तब-तब संत परंपरा ही उसे धर्ममार्ग पर पुनः स्थापित करती है।
“संतों का जीवन ही शास्त्र का सजीव स्वरूप है, और उनका आशीर्वाद ही समाज की सबसे बड़ी संपदा। जहाँ साधु-संत प्रतिष्ठित होते हैं, वहीं धर्म, राष्ट्र और मानवता का भविष्य सुरक्षित होता है।”


