जसवंतनगर/इटावा: ₹450 महीने के पारिश्रमिक पर 29 वर्षों की सेवा, अंशकालिक सफाई कर्मी की पीड़ा ने सिस्टम पर उठाए सवाल

 चीफ एडिटर: एम.एस वर्मा, 

मनोज कुमार, 



₹450 महीने के पारिश्रमिक पर 29 वर्षों की सेवा, अंशकालिक सफाई कर्मी की पीड़ा ने सिस्टम पर उठाए सवाल

जसवंतनगर/इटावा। कन्या प्राथमिक विद्यालय धनुवां में वर्ष 1996 से अंशकालिक सफाई कर्मी के रूप में कार्यरत महिला कर्मी की जिंदगी बीते लगभग तीन दशकों से संघर्ष, अभाव और अनकही पीड़ा में गुजर रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें पहली बार मात्र ₹50 प्रतिमाह के पारिश्रमिक पर काम पर रखा गया था। इसके बाद वर्ष 1998 में पारिश्रमिक बढ़कर ₹150 प्रतिमाह हुआ और वर्ष 2008 से ₹450 प्रतिमाह दिया गया जो अभी तक मिल रहा है। वर्तमान में यह राशि लगभग ₹15 प्रतिदिन बैठती है, जो आज के दौर में एक समय का भोजन जुटाने के लिए भी नाकाफी है।

             महिला कर्मी मुन्नी देवी ने भारी मन से बताया कि इतने कम पारिश्रमिक में परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए बहुत कठिन रहा है। पति लंबे समय से बीमार रहते हैं, इलाज और दवाइयों का खर्च उनके लिए लगातार चिंता का कारण बना रहा। घर की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उन्हें स्कूल की सफाई के बाद अलग-अलग स्थानों पर मजदूरी करनी पड़ी। कई बार हालात ऐसे बने कि रात के समय भी मजदूरी करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण अक्सर पहनने के लिए कपड़े तक दूसरों से मांग कर पहनने पड़ते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा और वर्षों तक ईमानदारी से सेवा करती रहीं।

               विभागीय पत्र-व्यवहार से यह तथ्य भी सामने आया है कि बेसिक शिक्षा परिषद के गठन से पूर्व, वर्ष 1972 के आसपास, कुछ विद्यालयों में डेढ़ रुपए से 3 रुपए प्रतिमाह तक के पारिश्रमिक पर भी अंशकालिक सफाई कर्मियों की नियुक्तियां की गई थीं। वहीं 20 अगस्त 2007 के शासनादेश के आधार पर 2008 से इन अंशकालिक सफाई कर्मियों को 450 रुपए प्रतिमाह परिश्रिक दिया गया। इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि समय के साथ जिम्मेदारी तो बढ़ी, लेकिन पारिश्रमिक में मानवीय स्तर का सुधार नहीं हो सका।

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                 इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से उठाते हुए समाजसेवी प्रेम कुमार शाक्य की ओर से संबंधित विभागों से पत्र-व्यवहार कराया गया, जिसके जवाब में शिक्षा विभाग द्वारा दो आदेश प्रतिलिपि भेजी गई हैं। इन विभागीय तथ्यों में अंशकालिक सफाई कर्मियों की पुरानी नियुक्तियों और पारिश्रमिक की स्थिति को स्वीकार किया गया है। श्री शाक्य ने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे कर्मियों की संख्या बहुत कम बची है, ऐसे में इन्हें उचित कार्य-परिसर, सम्मानजनक पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार और विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में श्रम विभाग से भी पत्र-व्यवहार कर आवश्यक कार्यवाही की मांग की गई है।

                   शिक्षा विभाग की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जिले अथवा प्रदेश में इस श्रेणी के कितने अन्य अंशकालिक सफाई कर्मी कार्यरत हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर इनकी संख्या सीमित है, ऐसे में सरकार स्तर पर निर्णय लेकर इनके पारिश्रमिक में वृद्धि और मानवीय राहत दी जा सकती है।