जसवंतनगर/इटावा: कर्तव्य पथ की बलिबेदी पर प्राण न्यौछावर किये सिपाही सुरेंद्र कुमार मौर्य ने

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मनोज कुमार, 7409103606

फर्ज़ की राह में गिर पड़ा डायल 112 का सिपाही सुरेंद्र—दो बेटियों के सिर से उठा पिता का साया, पुलिस विभाग में मातम

सैफई। जसवंतनगर मॉडल तहसील के सामने हाईवे पर शनिवार देर शाम हुए दर्दनाक सड़क हादसे में घायल डायल 112 के सिपाही सुरेंद्र कुमार मौर्य (38) ने रविवार रात लगभग 10 बजकर 50 मिनट के आस पास सैफई मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे की खबर मिलते ही पुलिस विभाग में शोक और गहरा सन्नाटा छा गया।

कर्तव्यनिष्ठ, मिलनसार और हमेशा मुस्कुराते रहने वाले सुरेंद्र अब हमेशा के लिए चले गए—यह बात साथी पुलिसकर्मियों को अंदर तक तोड़ गई।
शनिवार शाम ड्यूटी पर निकली डायल 112 गाड़ी को तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रक ने सामने से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि सिपाही सुरेंद्र और उनके साथी कांस्टेबल सुधांशु गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को सीएचसी से सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन सुरेंद्र को बचाया नहीं जा सका। सुधांशु का इलाज जारी है।
डायल 112 में आने से पूर्व सुरेन्द्र मौर्या  इटावा विधायका सरिता भदौरिया के सिक्योरिटी गार्ड रहे इससे पूर्व सपा महा सचिव प्रो. राम गोपाल यादव के सिक्योरिटी गार्ड के रूप में सेवाएं दे चुके थे.
चीते जैसी फुर्ती और लम्बे कदकाठी के धनी सुरेन्द्र मौर्या किसी अफसर से कम नजर नहीं आते थे.
घटना के बाद जसवंतनगर पुलिस मौके पर पहुंची और कानूनी कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

पोस्टमार्टम के दौरान सीओ सैफई केपी सिंह, जसवंतनगर थाना प्रभारी कमल भाटी, सैफई प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह राठी सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। हर किसी की आंखें नम थीं—सबने नम आंखों से अपने साथी को अंतिम विदाई दी।

मूल रूप से झांसी के थाना प्रेम नगर क्षेत्र के ग्राम राजगढ़ निवासी सुरेंद्र की भर्ती 13 जनवरी 2011 को हुई थी और वे 19 सितंबर 2022 से जसवंतनगर डायल 112 पर तैनात थे। उनकी अचानक हुई मौत से पूरा विभाग सदमे में है।

साथियों के मुताबिक—“सुरेंद्र बेहद ईमानदार, शांत स्वभाव और मिलनसार थे। ड्यूटी हो या कोई मुसीबत—सबसे पहले वही खड़े मिलते थे।”

घर में मातम का माहौल दिल दहला देने वाला है।

पत्नी मोनिका का रो-रोकर बुरा हाल है और उनकी मासूम बेटियाँ माही और भूमि बार-बार पूछ रही हैं—

“पापा कब आएंगे?”

इस एक सवाल ने हर किसी की आंखें भर दीं।

पिता नेत्रपाल ने रोते हुए कहा—

“तीनों बेटों में सुरेंद्र सबसे बड़ा था… दो महीने पहले ही घर आया था… आज यह खबर मिली तो हमारे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।”

मां सुमित्रा की हालत भी बेहद खराब है। पूरे गांव में शोक की लहर है।

फर्ज़ निभाते-निभाते अपनी अंतिम सांस लेने वाले सिपाही सुरेंद्र मौर्य की ईमानदारी, सादगी और सेवाभाव को पुलिस विभाग, साथी और क्षेत्र हमेशा याद रखेंगे।

यह सिर्फ एक मौत नहीं—यह एक कर्तव्यनिष्ठ सिपाही की शहादत है।

बाइट सुरेंद्र कुमार मौर्य के पिता